मृदा गठन या मृदा कणाकार Soil Texture in hindi What are the 4 main components of soil texture in hindi?

मृदा गठन या मृदा कणाकार Soil Texture in hindi What are the 4 main components of soil texture? What are the 5 main components of soil? मृदा गठन या मृदा कणाकार . मृदा गठन किसे कहते हैं इसका कृषि में महत्व समझाइए

भौतिक दृष्टि से मृदा एक बहुप्रवस्था (Polyphase) का परिलक्षित तंत्र (Dispersed System) है तथा कसे अधिक विषम प्रावस्था में जल एवं मृदा का घोल आता है। जो स्थान द्रव द्वारा नहीं घेरा जाता है उसमें वायु तथा गैसें होती है।

मृदा गठन किसी प्रदत्त मृदा में खनिज कंणों के आकारों के विभिन्न समूहों के अनुपात को प्रकट करता है। इसकी परिभाषा निम्न प्रकार है: “मृदा में विभिन्न मृदा वर्ग के कणों से आपेक्षिक अनुपात को मृदा कणाकार कहते है।”

“The relatice roportions of soil saperates in a particulars soil determine its soil texture” or size of soil particles called soil texture.

खनिज पदार्थों में साधारणतः 45 प्रतिशत खनिज, 30 प्रतिशत जल, 20 प्रतिशत वायु तथा 5 प्रतिशत लगभग जैव पदार्थ होता है। इनकी मात्रा कम या अधिक भी हो सकती है।

जैसे पीट मृदा में 5 प्रतिशत. कसे कम तथा बलुई मृदा में 95 प्रतिशत खनिज होता है, इसी प्रकार जल में भी मिन्नता हो सकती है। खनिजीय कण शैली के अपक्षय से प्राप्त होते हैं। जैविक कण पादप एवं जन्तु अवशेषों के अर्पघटन से प्राप्त होते हैं।

इन कणों का आकार भिन्न-भिन्न होता है जिनमें मोटे आकार वाले कण आँखों से देखे जा सकते हैं, जबकि अतिसुक्ष्म इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से ही देखे जा सकते है। मृदा गतन मृदा की महत्वपूर्ण विशिष्टता है, क्योंकि यह मृदा की जलग्रहण एवं अधिशोषण क्षमता, जुताई एवं वातन (Aeration) आदि के साथ-साथ मृदा की उर्वरता को भी प्रभावित करता है।

उदाहरण के तौर पर, स्थूल बलुई मृदा सरलता से जोती जा सकती है। इसमें उत्तम वातन तथा जड़ वृद्धि होगी। यह शीघ्र गीली होती है एवं सूख जाती है। ऐसी मृदाओं में पोषक तत्त्वों की न्यूनता होती है,

क्योंकि ये मृदा परिच्छेदिका में अन्तःस्रावण के कारण नीचे की परतों में चले जाते हैं। इसके अलावा मृतिका में सूक्ष्म कण होते हैं जो आपस में दृढ़ता से फैंसे होत है जिसमें खुला रन्ध्रावकाश कम होता है. जिससे ये मृदाएँ बड़ी कठिनता से गीली व सूखी होती है।

इनका निकास व जुताई बड़ी कठनाई से होती है। मृदा गठन में परिवर्तन नहीं होता। बलुई मृदा हमेशा बलुई तथा मृतिकायुक्त मृदा सदैव मतिकीय (Clay) ही रहेगी, क्योंकि कणों का आकार सरलता से परिवर्तित नहीं हो सकता।